दीप और बाती- अनिता मंदिलवार सपना


 

सपना सुप्रभाती 

दीप जले है भोर तक, बाती का है संग ।

नभ ताके जो भोर है, जैसे उड़े पतंग ।।

ऽ●अनिता मंदिलवार सपना 

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