गंगोदक सवैया- अनिता मंदिलवार सपना

 



गंगोदक सवैया

मापनी-
212 212 212 212, 212 212 212 212

मात हंसासना आप मेरी सुनो, भक्त हूँ माँ कहूँ क्या तुझे शारदे ।
ज्ञान दे दो मिटे आज अज्ञानता, प्रार्थना है यही, ज्ञान माँ चार दे ।
छंद की ये विधा सीख लूँ मैं यहाँ, छांदसी काव्य का माँ अभी सार दे।
साधना लेखनी की चले जो अभी, शब्द हो सारथी काज को पार दे ।

अनिता मंदिलवार सपना 

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